Wednesday, September 23, 2015

आखिर कब तक वौट बैंक के लिए आरक्षण दिया जायेगा।



सामाजिक-आर्थिक बराबरी का लक्ष्य हासिल करने के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की गई थी  और 65 साल के अन्तराल भी  आरक्षण की व्यवस्था जस की तस बनी हुइ्र है। आर एस एस प्रमुख मोहन राव भागवत ने जिस अधिकार के साथ आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने का सुझाव दे डाला है वह बिल्कुल सही है। अब उनके साथ शिव सेना ने भी यही बात कही है। आरक्षण से राजनितिक पार्टीया अपनी सत्ता बचाये रखना चाहती है

बिहार में आरक्षण के उपर हो रही राजनीती से यह साबित हो गया कि हमारे देश का सिस्टम कितना लचर है। हर कोइ पाटी्र आरक्षण के पक्ष में हैं। आरक्षण से हो रहे नुकसान को कोइ्र पाटी देखना नही चाहती है। सरकारी नौकरी पाने का सबसे आसान तरीका है आरक्षण।

एक तरफ देश में हर साल बेरोजगारों की संख्या बढती जा रही है। दूसरी तरफ राजनितिक पाटी्रया अपना उल्लू सीधा करने में लगी हुइ है। 

एक के बाद एक जातीयाॅ देश में आरक्षण का लाभ लेना चाहेंगे। पहले गुज्ररो ने आरक्षण के लिए माॅग उठाइ्र और गुजरात में पटेल  समुदाय ने भी माॅग उठाइ है और धीरे धीरे देश मे और जातियाॅ भी इसके लिए आन्दोलन करेगी। आरक्षण से नौकरी पाने का सबसे सरल तरीका है, आरक्षण  की आड मे आज हर राजनिति पार्टीया अपना उल्लू सीधा करते रहते है और समय समय पर वोट बैंक की राजनीति के कारण आज आरक्षण जस का तस बना हुआ है।

एक समय ऐसा आयेगा जब सवण्र तबके के लोगों आरक्षण के लिए आवाज उठाना शुरू कर देगे। समय रहते अगर आरक्षण जैसे सवेदनाशील मसले पर सरकार चेती नही तो उन दिन दूर नही है जब आरक्षण के लिए खूनी खेल शुरू हो जायेगा।

केन्द्र एंव राज्य सरकारों को नौकरीयों में आरक्षण खत्म कर देना चाहिए। आरक्षण सिफ्र पढाइ्र में देना चाहिए और उन परिवारो ंको सरकार को आथिक्र सहायता देनी चाहिए। जिससे गरीब एंव पिछडें तबके के लोगों को शिक्षित  बनाया जाए ताकि वे अपने पैरों पर खडे हो सके 

आज लगभग हर सरकार एंव राजनितिक पाटी्रयों की आरक्षण के उपर दो राय है एक तकबा चाहता है कि आरक्षण मिले और दूसरा चाहता है कि आरक्षण खत्म होना चाहिए लेकिन सरकारे वोट बैक के कारण इस आरक्षण रूपी तुरूप के इके को खोना नही चाहते है।

आरक्षण को जातीय आधार पर देना चाहिए एंव उन जातियों की मिलना चाहिए जो आज भी विकसित नही हो पाये है। जिनका विकास अभी तक नही हो पाया है।

आर0एस0एस0 प्रमुख मोहन का बयान राजनिति प्रेरित नही इसलिए उन्होने आरक्षण के उपर अपनी सही राय दी ताकि देश में किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न हो सेके ।

खासतौर अल्पसख्यको की हिमायती एंव राज्य स्तरीय पाटी्रया आरक्षण के पक्ष में है, आरक्षण से क्षेचीय पाटी्रया अपनी राजनितिक रोटीया सेकते है 



Durgesh Ranakoti
Dehradun Uttarakhand
24 Sep. 2015