Tuesday, November 4, 2014

Minimum Qualification Must for MP, MLA


Minimum Qualification Must for MP, MLA: SC

The time has come for parliament to prescribe some Minimum Qualification for parliamentarians/ Legislators as prescribed in other fields, the Supreme Court observed recently.
Justice Madan Lokur, in his separate but concurring judgment on the PIL field in 2005 seeking removal of tainted Ministers, recalled the words of the first president, Dr. Rajendra Prasad, in the Constituent Assembly that he would have liked to have some Qualifications laid down for members of Legislatures.



Durgesh Ranakoti
Dehradun Uttarakhand
04 Nov 2014

Public - Private Partnership Model


Public - Private Partnership Model (PPP Model)

Public-Private Partnership Model Government has ruled out taking the support of private companies in reviving sick Central Public Sector Enterprises, predecessor that had floated the idea. PSUs to come to the aid of weaker ones, In Sep 2013 the UPA govt. explored options for revival of these PSUs through a tip-up with Private companies in the Public-Private Partnership Model.     
The Proposal never took off due to the lack of synergy between the PSUs and the Private Companies.
One reason for ruling out equity participation from private companies relates to the surplus land with the PSUs. The government felt that there could be a conflict on ownership and utilization if joint ventures were to take place. The government has an alternate solution within the PSU sphere. There are expectations that potentially profitable CPSEs can register a turnaround within the next five years.
These could then bail out the weaker units by exploring greater synergy. As of 2014, there are 50 CPSEs, which are making losses over the past three consecutive years.


www.d4world.com
Durgesh Ranakoti, 
Dehradun, Uttarakhand
04 Nov 2014  

Monday, June 2, 2014

कोलकत्ता बना आईपीएल ७ का विजेता


Report: Final – KKR v KXIP


कोलकत्ता बना आईपीएल ७ का विजेता। कोलकत्ता ने पेप्सी आईपीएल ०७ मे किंग्स इलेवन पंजाब को एक   रोमांचक मुकाबले मे हरा कर खिताब अपने नाम किया। इस फाइनल मैच के हीरो रहे मनीष पाण्डेय उन्होने ५० गेंदों मे ९४ रन बनाये । इस मैच मे सभी घरेलू खिलाडी चले । 





तेलंगाना बना देश का २९ वा राज्य



  तेलंगाना बना देश का २९ वा राज्य 29वां राज्य । चंद्रशेखर राव बने पहले मुख्य्मंत्री 


Thursday, May 29, 2014

नरेन्द्र दामोदर दास मोदी बने देश के 15वें प्रधानमंत्री

                                         
                    नरेन्द्र दामोदर दास मोदी बने देश के 15वें प्रधानमंत्री


16वीं लोकसभा में 15वें प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन के प्रागण में लगभग चार हजार मेंहमानों में शार्क देशों के राष्ट्रध्यक्ष, और यू0पी0ए0 अध्यक्ष सोनिया गाॅधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गाॅधी, पूर्व राष्ट्रपति ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम एंव कई नामचीन हस्तियो के बीच राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शपथ दिलाई। इसमें 45 मंत्रियों में 23 कैबिनेट, 10 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 12 राज्यमंत्री हैं। यह वह ऐतिहासिक क्षण था जब देश में पहली बार कोई पूर्ण बहुमत वाली गैरकांग्रेसी सरकार बनी। इस शपथ ग्रहण समारोह के जो प्रमुख साक्षी रहे, उनमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, मारीशस के पी0एम0 नवीन रामगुलाम, भूटान के पी0एम0 शेरिंग तोबगे, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिद्रा राजपक्षे, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, और मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुला यामीन और नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला आदि मौजूद थे।

मोदी मंत्रीमण्डल में राजनाथ सिंह गृहमंत्री, सुषमा स्वराज विदेशमंत्री, अरूण जेटली वित्त और रक्षा, नितिन गडकरी भूतल परिवहन, डी0वी0 सदंानद गौड़ा रेलमंत्री, उमा भारती जल संसाधन, नजमा हबदुल्ला अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, गोपीनाथ मुडे़ ग्रामीण विकास, कलराज मिश्र भारी उद्योग, मेनका गाॅधी महिला एंव बाल कल्याण, अंनत कुमार संसदीय कार्य, रविशंकर प्रसाद कानून और दूर संचार एंव सूचना प्रसारण, स्मृति ईरानी मानव संसाधन विकास, डाॅ हर्षवर्धन स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्री और वैकैया नायडू और अंनत गीते मंत्रालय तह नहीं। इस मंत्री मण्डल सात महिलायें शामिल हैं, इसमें ऊर्जावान एंव युवाओं को तरहीज दी गई है और वशंवाद से दूरी एंव संघ की छवि भी साफ दिखी और मुरली मनोहर जोशी एंव यशंवत सिन्हा इस सरकार में जगह नही बना पाये। उत्तरप्रदेश से सर्वाधिक आठ मंत्री चार कैबिनेट, दो राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार), दो राज्यमंत्री बने। इस शपथ ग्रहण समारोह के लगभग चार हजार देशी-विदेशी नागरिक साक्षी रहे।

 इस मंत्रीमण्डल में उत्तराखण्ड एंव हिमाचल के जिम्मे एक भी सीट नहीं मिली 17 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के खाते में एक भी सीट न आ सकी । हैरानी की बात यह है कि अटल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे भूवन चन्द्र खडूडी जी को भी इस मंत्रीमण्डल जगह नही मिल पायी। इस मंत्री मण्डल में सबसे चैकाने वाला फैसला स्मृति ईरानी को मानव एंव संसाधन एंव विकास मंत्रालय की जिम्मदारी देना।
हाॅलाकि इतने जल्दी कुछ भी ठीक नही होगा क्योंकि दस सालों में काॅग्रेस ने देश को गर्त में ले गये, भाजपा सरकार के लिए इन परस्थीतीयों से निपटने के लिए अभी बहुत समय लगेगा, स्वयं मोदी जी केन्द्र में नया चेहरा है, उनसे अपेक्षाए बहुत हैं।

मोदी की असली परीक्षा अब है कि चुनौतियों से वह किस प्रकार से निपटते हैं। पार्टी में मंत्रालय वितरण एंव अस्तुष्ठ नेताओं और भ्रष्टाचार, मॅंहगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और आर्थिक विकास को पटरी पर लाने से वे किस तरह से निपटते हैं। 


दुर्गेश रणाकोटी 
देहरादून, उत्तराखण्ड 
29 मई 2014,     

Wednesday, May 14, 2014

देश के निर्वाचन इतिहास में नया किर्तिमान



देश के निर्वाचन इतिहास में नया किर्तिमान स्थापित हुआ।


16वीं लोकसभा चुनाव नौ चरणों में सम्पन्न हुआ।  ये चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे लम्बा चुनाव सम्पन्न हुआ। और इसके साथ इस चुनाव में मतदान का नया किर्तिमान 66.38 प्रतिशत का स्थापित हुआ। इस बार अप्रैल-मई में हुए मतदान में लोगों ने भारी उत्साह दिखाया। इस बार चुनाव आयोग का मतदाताओं का जागरूक करने का काम सही रहा। इससे पहले 1984 में भारी मतदान 64.01 प्रतिषत सम्पन्न हुआ था, लेकिन 2014 में हुए चुनाव ने मतदान के पुराने रिकार्ड तोडते हुए देश मे निर्वाचन का नया कीर्तिमान स्थापित किया,  1984 में काॅग्रेस की लहर थी और काॅग्रेस ने 414 सीटो को जीतकर परचम लहराया था और इस बार भाजपा की लहर है। अब देखना है कि भाजपा इस बार कितने सीटे जीतकर लाती है।

दुर्गेश रणाकोटी 
देहरादून, उत्तराखण्ड़
14 मई 2014

Monday, April 14, 2014

बीजेपी का २७० का आँकड़ा


बीजेपी का २७० का आँकड़ा

चुनाव के बाद इस बार अगर बीजेपी २२० से २७० का ऑकड़ा नहीं छुती है। तो इस चुनाव के बाद इस्पस्ट हो जायेगा की मोदी लहर और आरएसएस का बीजेपी में बार-बार हस्तकछेप बीजेपी को नुकसान के अलावा कुछ और नहीं करपाता है। चाहे पुराने नेताओ की अनदेखी हो या आडवाणी जी को किनारे करने की, क्यूकि संघ की अडवाणी जी के आगे ज्यादा नहीं चलती थी 

 बीजेपी की मात्रसत्तात्मक पार्टी आर0एस0एस0 इस चुनाव में अगर बी0जे0पी0 पूर्ण बहुमत हासिल नही कर सकी तो यह साफ हो जायेगा। कि आर0एस0एस0 कि वजह से पार्टी हर बार गलितीयों को दोहराती है चाहे आड़वाणी जी को दरकिनार करने का मुद्दा हो या फिर नये चेहरे को लाना और गुजरात माॅडल को प्रोजेक्ट करना।

यह बात भाजपा शासित राज्यों में चाहे वह मध्यप्रदेष, गोवा, छत्तीसगढ़,  इन तीनों मुख्यमंत्रीयो के अच्छे काम को सराह कर ही जनता ने इनको दुबारा एंव तीबारा मौका दिया। है।

लम्बे समय से पार्टी की सेवा कर रहे नेताओं की उपेक्षा न हो जिन्होंने पार्टी को अपना सर्वस्व दिया हो, और उनको मौका दिया जाए, दिया हो, और उनको वह मान-सम्मान और पद न मिलना, पार्टी के इतने लम्बे समय से सेवा का फल न मिलना पार्टी के लिए एवं नए नेताओ के लिए सबक है, कि पार्टी ने इस बार मोदी को पार्टी से बड़ा  कद दे दिया जो पार्टी के लिए नुकसान देह हो सकता है


भाजपा अगर सत्ता में आती है तो ठीक है नही तो पार्टी को बहुत नुकसान होगा। क्योकि पार्टी  में असन्तुश्ठ नेताओं की लम्बी कतार बन रही है जो पार्टी के लिए बडा सरदर्द है। अब चुनाव परिणाम ही बतायेगें कि क्या होगा।


दुर्गेश रणाकोटी 
कारगी, देहरादून 






Tuesday, April 8, 2014

मोदी जी अपने राजनीति गुरु आडवाणी जी के साथ



  मोदी जी ने अपने राजनीति गुरु आडवाणी जी के साथ उनके गाधीनगर से चुनाव में नामांकन भरने  के समय उनके साथ जाकर पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया है। और सभी को साथ लेकर चलने से पार्टी में एकजुटता रहेगी और सभी पार्टी के नेता और कार्यकर्त्ता में उत्साह भी होगा। 

Tuesday, March 25, 2014

भाजपा में बढ़ता असंतोष


 भाजपा में बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए ठिक नहीं है सीनियर लीडरऒ कि अनदेखी उनको भारी न पड जाये
बार बार यह अन्तर कलह सामने आ रहा जो कि पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है ।
राजनाथ- मोदी जुगलबन्दी, अटल अडवाणी जी जैसी नहीं है, इसमें सीनियर लीडर उपेकछित महसुस कर रहे हैं। बार बार उनकी उपेक्छा हो रही है, पार्टी में टिकट वितरण को लेकर सीनियर लीडर नाखुश हैं। पार्टी वनमैं न शो के फॉर्मूले पर चल रही हैं । जिस तरह जसवंत सिह पार्टी के पुराने नेता एवं अटल सरकार के प्रमुख नेता को भी इस चुनाव में नाखुश होकर बाड़मेर से निर्दलिय होकर चुनाव लड़ना पड़ रहा है। इससे पहले भी कई नेता चुनाव में टिकट वितरण को लेकर नाराज़ चल रहे हैं। पार्टी के पितामाह लाल कृृष्ण आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज  भी उपेक्छित हैं ।

Thursday, February 20, 2014

चुनावी बजट 2014


चुनावी बजट 2014

वित्तमंत्री पी0 चिदम्बरम का चुनावी बजट लोकलुभावना होने के साथ साथ उन्होंने मध्यमर्गीय लोगों की आवश्यकता वाली चींजो का उत्पादन शुल्क घटाकर जैसे कार, बाइक, गीजर, माइक्रोवेव ओवन, टी0वी0, फ्रिज, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन,को सस्ते करने का रास्ता साफ किया है। एंव विशेषकर सैनिकों की लम्बे समय से चली आ रही माॅंग वन रैंक वन पेंशन को पूरा किया है। ।
2009 से पहले एजूकेशन लोन में ब्याज को माफकर, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर निर्भया फड़ में बढ़ोत्तरी करके और किसानों को सस्ती दर कृषि ऋण उपलबध कराना है। पहाड़ी राज्यों के लिए 1200 करोड़ रूपये की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता दी जायेगी। यह अंतरिम बजट चार महीनों के लिए पेश किया गया है लेकिन इसमें आम आदमी की जरूरत की चीजें रोटी कपड़ा और मकान की आवश्यकता दो वक्त की रोटी होती है। इस बजट में महॅगाई का कहीं जिक्र तक नहीं हैै।, जो यू0पी0ए0 सरकार की नाकामयाबी का सबसे बड़ा उदाहरण है। पेट्रोल के बढ़ते दामों को नियत्रण एंव उससे सम्बधित कोई घोषणा इसमें नहीं है, जिससे आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान है। इस बजट से सरकार को अगर आम लोगों को खुश करना था, तो आम आदमी की जरूरत की चीजो को सस्ता करके महॅगाई को कम करने को लेकर होना चाहिए था।  कोरोसिन एंव एल0पी0जी0 में भी सरकार  को राहत देनी चाहिए थी,
लोक लुभावनी घोषणाओं को छोड़कर आम आदमी को ध्यान मेें रखना चाहिए था। हाॅलाकि जाते जाते-जाते  काॅग्रेस ने सैनिकों को ‘‘वन रैंक वन पेंशन’’ का तोहफा देकर खुश जरूर कर दिया है।

दुर्गेश रणाकोटी
देहरादून, उत्तराखण्ड
20 फरवरी 2014

Thursday, January 9, 2014

Live in relationship


लिव इन रिलेशनशिप 

लिव इन रिलेशनशिप  को कानून का दर्जा मिलने वाला है, लेकिन इसको कानून का दर्जा मिलने से पहले इसके कुछ पहलुओं पर जरूर विचार विमर्श  होना चाहिए। समाज एंव रूढि़वादी मानसिकता के लोग इस पर जरूर बबाल मचाऐगें पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है। किसी की आर्थिक आजादी पर किसी भी व्यक्ति का कोई हस्तकक्षेप नही होना चाहिए सभी को अपने जीवन को जीने का हक है वह किस तरह जिता है इस पर किसी भी इंसान को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए। हर आदमी को जीने को हक है वह किस तरह जिता इस पर सिर्फ और सिर्फ मात्र उसका हक है।

लिव इन रिलेशनशिप  में रहने वाले स्त्री-पुरूश कानून के दायरे में आने चाहिए, ताकि महिलाओं के अधिकरो का शोषण न हो, इनका पंजीकरण होना चाहिए क्योंकि महानगरो में लिव इन रिलेषनषीप का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है। और इससे तलाक के मामलो में भी वृद्धि हो रही है, इसिलिए राश्ट्रीय महिला आयोग की राय है कि ऐसी महिलाओं को गुजारे भत्ते का पूरा हक मिलना चाहिए, और ऐसे संबधो से पैदा हुए बच्चों को पिता की संपत्ति पर पूरा हक मिलना चाहिए।

संविधान निर्माण के समय लिव इन रिलेशनशिप के बारे में किसी ने सोचा भी नही होगा लेकिन समय के बदलने के कारण स्त्री-पुरूश भागदौड़ की जिंदगी एंव कैरियर के कारण  षादी ब्याह के झमेलो से बचने के लिए लिव इन रिलेशनशिप मे रहना पंसद कर रहे हैं। इसलिए इसको कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए।लिव इन रिलेशनशिप  के परिपेक्ष सुप्रीम कोर्ट ने संसद से यह कहा है कि वह घरेलू हिंसा अधिनियम में ऐसी तब्दीलियां करे जिससे लिव इन रिलेशनशिप  में बधी महिलाओं और उनके बच्चों को भी उसके तहत सुरक्षा मिल सके।

एक निष्चित समय से ज्याद समय तक एक साथ रहने वाले स्त्री-पुरूश के   को कानूनी मान्यता मिल सके ताकि उन से उत्पन्न संतान को कानूनी अधिकार मिल सके।

सुप्रिम कोर्ट ने भा0दड संहिता की धारा-377 को संवैधानिकता बरकरार रखते हुए कहा कि एंकात स्थान पर दो पुरूश या दो महिलायें के बीच बनाया गया यौन संबधं इस धारा के तहत दंडनीय अपराध है।  इसमें अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। यह कानून 150 साल पुराना है। इसमें  परिवर्तन होना चाहिये 

दुर्गेश रणाकोटी 
देहरादून, उत्तराखंड