Tuesday, October 29, 2013

धर्म के नाम पर


धर्म  के नाम पर 


धर्म के नाम पर देश में कुछ भी कर सकतें है। भारत में धर्म के नाम लूट हैं अभी हाल में मध्य प्रदेश  के दतिया में भगदड मचने से 110 से ऊपर  श्रद्वालुओं की मौत हो गई है। धर्म के नाम पर इस कदर पागल पन्ती है। धर्म के नाम पर एक दूसरे को बहलाकर कश्मीर  में आंतकवाद फैलाया जाता है, और हम एक दूसरे के खून के दुष्मन बन जाते है।

चाहे वह अयोध्या हो या गोधरा एंव मुम्बई बम ब्लाट हो या पंजाब में आतकवाद यह सब हम लोगों को धर्म के नाम पर लड़ा दिया जाता है इसकी सबसे ज्यादा मार गरीब, असाय एंव अषिक्षित लोगों पर पड़ती है।, वो लोग उन्माद एंव जोश  में आकर अपना सब कुछ गवा बैठते है। 

आज 21 वी सदी में हमारे देश में धर्म के नाम पर एक दूसरे के खून के प्यासे हो रखे है एक तरफ 26 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से निचे जीवन यापन कर रही है और हम आज तक पिछडे़ है। आज भी हम खोखले रिती रिवाजो के चक्कर में पड़कर देश  के साथ-साथ अपना नुकसान कर रहे है।

हम आज तक इसलिए पिछडे़ हुए है, क्योंकि हम आज तक जात-पात, रीतिरिवाजों, क्षेत्रवाद, आरक्षण, गरीबी , अषिक्षा और वोट बैंक की राजनीति के कारण हम आज तक विकशित  देश  की श्रेणी में नही आ सके क्योंकि हम आज भी दकियानुसी बातों के चक्कर में पडे़ है। हमें आगे बढ़ने  के लिए इन सब बातो को छोड़कर सिर्फ हम इंसान है और काम पर ध्यान देना चाहिए। 

आरक्षण के कारण अयोग्यता को बढ़ावा दिया जा रहा है। आजादी के समय यह आरक्षण सिर्फ 10 सालो के लिए लागू किया गया था। लेकिन वोट बैंक की राजनिति के कारण यह अब कभी भी खत्म नही होने वाला है। और जो पिछड़े हैं वो पिछड़े ही रहेगे वो आज भी आजादी से अब तक पिछड़े लोग पिछड़े ही है। राष्ट्रीय राजनितिक पार्टीया भी सिर्फ वोट बैंक के कारण देश का नुकसान कर रहे हैं। क्षेत्रीय पार्टीयों को जो काम करना चाहिए था, उन कामों को राष्ट्रीय पार्टीया कर रही है।

 कम से कम काॅग्रेस पार्टी एंव भारतीय जनता पार्टी को देशहित में सोचना चाहिए जिससे देश का विकास हो सके और विकासशील देश विकसित देश की श्रेणी में आ सके।


दुर्गेश रणाकोटी
देहरादून, उत्तराखण्ड
29 अक्टूबर 2013

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