Saturday, December 8, 2012


पत्राचार से दी गयी षिक्षा आज युवा वर्ग भारत वर्श मे षिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है जो कि देष के लिए भी ठीक नही है सिर्फ पैषो के आधार पर डिग्रीयाॅं खरीदी जा रही है। पत्राचार के माध्यम से दी गयी षिक्षा दूरस्थ षिक्षा के नाम पर संस्थान खोले जा रहे है तथा उन से दी जाने वाली षिक्षा की गुणवता पूर्वक षिक्षा का अभाव है दूरस्थ षिक्षा में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके परीक्षा केन्द्रों में परीक्षा कराने के तौर तरीके पर सवालिया निषान आज भी जस का तस बना हुआ है। जबकि षिक्षा एक अहम मुद्दा है कोई भी देष तभी विकसीत राश्ट्र नही बन सकता ़है जब तक उसके सभी नागरिक षिक्षित न हो भारत सरकार को एंव राजनीतिक पार्टीयों को दल गत भावनाओ से उप उठकर देषहित मेे सोचना चाहिए कि षिक्षा का बाजारीकरण न हो 

No comments:

Post a Comment