Tuesday, December 11, 2012


जब कभी जाम एंव टैक्स के विरोध मेें व्यापारीगण बंद/चक्का जाम रखते है तो आम जनता के साथ-ंउचयसाथ व्यवसायिक संस्थानों एंव कालेज, स्कूल एंव प्रषिक्षण संस्थानों को भी उनका साथ देना चाहिए महगांई के विरोध में जब बंद था तो भारत वर्श में कई व्यवसायिक संस्थानों एंव कालेज, स्कूल एंव प्रषिक्षण संस्थान खुले थे तो समज में नही आ रहा था कि ये लोग मंहगाई के पक्ष में थे या विरोध में महगांई से आज पुरा समाज परेषान है क्या इनको आम आदमी से कोई लेना देना नही है। आज समाज में महगांई आम आदमी के लिए दो रोटी जुटाने के लिए भी कडी मेहनत मषक्त करनी पडी रही है यू0पी0ए0 गवरमेन्ट में एक निर्णय की गाॅवों में 19 एंव षहरो में आम आदमी 26रू0 मेे जीवन बसर कर सकता है। भारत सरकार के निर्णय से ग्रामीण एंव षहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार एंव योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आलूवालिया की बहुत किरकिरी हुई। आज फिर से यू0पी0ए0 गवर्मेट ने हर हाथ में मोबाइल का ऐजंडा है भारत जैसे देष में जहाॅ आज भी गरीबी व्यापत है बहुत सारे घरो में आज भी दो वक्त की रोटी नसीब नही है वहाॅ पर भारत सरकार का हर हाथ मोबाइल का एजेडा बेतुका बयान है एक तो जनता मंहगाई से परेषान है एक तरफ रसोई गैस सेलेण्डरो से सब्सीडी खत्म कर दी गयी और रसोई गैस आम आदमी एंव गरीब आदमी की पहुच से दूर होता जा रहा है आम आदमी की मूल-ंउचयभूत आवष्यकताओं की चीज रोटी,कपड़ा और मकान की चीजो मे बेहतासा वृद्वि कर रहा है इसके खिलाफ सभी लोगों को मिल-ंउचयजुल कर साथ देना चाहिए 

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